❣❣❣❣❣❣❣❣ जादूगरनी... Open Guptchar वो लड़की जादूगरनी है। कभी शोला, कभी शबनम जैसी, कभी दूज, कभी पूनम जैसी, कभी गुस्सा, कभी सरगम जैसी, कभी चोंट, कभी मरहम जैसी, कभी शीशम, कभी रेशम जैसी, कभी गैर, कभी हम-दम जैसी, कभी वो सम, कभी विषम जैसी, रोज़ बदलते मौसम जैसी, रंग-बिरंगी मौरनी है, वो लड़की जादूगरनी है। कभी वो मक्खन, कभी मलाई, कभी वो मिर्ची, कभी मिठाई, कभी नगाड़ा, कभी शहनाई, कभी अलसाई, कभी अँगडाई, कभी वो झूठी, कभी सच्चाई, कभी बुराई, कभी भलाई, कभी कहानी, कभी कविताई, उसने मेरी नींद चुराई, इस दिल की एक चोरनी है, वो लड़की जादूगरनी है। चंचल चितवन मादक नूरी, खिली-खिली सी वो पांखुरी, नख से शिख तक लगे अँगुरी, नैन मिलें तो चल गई छुरी, वो मेरे जीवन की धुरी, धड़कन उसके बिना अधूरी, सही न जाएं उससे दूरी, जिसकी नाभि में कस्तुरी, प्रेम वन की एक हिरनी है, वो लड़की जादूगरनी है। ❣❣❣❣❣❣❣❣
❣❣❣❣❣❣❣❣ खिलौना... गुड्डा- गुड्डी, रोना- धोना, ये बचपन का जादू टोना। भूल गयी जी नूतन पीढी, मोबाइल बस खेल खिलौना। प्यार बडा परवान चढा है, तन- मन लगता सोना- सोना। लडका- लडकी खेल रहे है, इक- दूजे को समझ खिलौना। चाह जिसे बस दौलत की है, ऊँचा फिर भी लगता बोना। उसके हाथों की कठपुतली, समझ रहा वो महज खिलौना। मुँह में राम बगल में छूरी, बंद करों ये काम घिनोना। साँसें किसकी कब थम जाएं, ये दिल भी है एक खिलौना। ❣❣❣❣❣❣❣❣